संत कबीर यांची रचना
गुरु बिन कौन बतावे वाट ।
बडा बिकट यम घाट ।।१।।
भ्रांति की बाडी नदियां बिचमों ।
अहंकारकी लाट ।।२।।
मद मत्सरकी धार बरसत ।
माया पवन घनदाट ।।३।।
काम क्रोध दो पर्वत ठाडे ।
लोभ चोर संगात ।।४।।
कहत कबीरा सुन मेरे गुनिया ।
क्यौं करना बोभाट ।।५।।
- संत कबीर (संकलक : प्रसाद वैद्य, रत्नागिरी)
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